पर्वतों की गोद में बसा, हरियाली का स्वर्ग है,
झरनों की कल-कल बोली में, प्रकृति का नित्य पर्व है।
खनिजों से भरपूर धरा, कोयला, लोहा, सोना पाए,
भारत की अर्थव्यवस्था में, अमूल्य योगदान दिखाए।
जनजातियों की माटी है ये, परंपरा की पहचान है,
संघर्षों से संजोई संस्कृति, वीर बिरसा की शान है।
संजोए लोकगीत, नृत्य, चित्रकला की अद्भुत छाया,
हर कोना कहता है गौरव से — “हम ही असली माया।”
चूड़ा-दही, हैंडिया, पिठा, स्वाद में सबका दिल जीते,
सरहुल, करमा, तुसु की रौनक, पर्वों से जीवन रीते।
दुलर्भ वन्यजीवों की शरण स्थली, पलामू हो या दलमा,
हरियाली की इस थाली में, छिपा है जीवन का करिश्मा।
रांची की ठंडी हवाएँ, नेतरहाट की सुबह सुनहरी,
देवघर की बाबा बैद्यनाथ में, आस्था की धारा गहरी।
उद्योगों की नींव यहाँ, इस्पात से लेकर ऊर्जा तक,
झारखंड है वो दीपक जो, भारत को करे प्रज्वलित सब तक।
न सिर्फ खनिज, न सिर्फ जंगल, यह जनशक्ति का गान है,
भारत के हृदय में बसता, झारखंड महान है।
